श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं
ध्यानं –
श्रीमच्चंदनचर्चितोज्ज्वलवपुः शुक्लांबरा मल्लिका-
-मालालालित कुंतला प्रविलसन्मुक्तावलीशोभना |
सर्वज्ञाननिधानपुस्तकधरा रुद्राक्षमालांकिता
वाग्देवी वदनांबुजे वसतु मे त्रैलोक्यमाता शुभा ||
श्री नारद उवाच |
भगवन् परमेशान सर्वलोकैकनायक |
कथं सरस्वती साक्षात् प्रसन्ना परमेष्ठिनः || 2 ||
कथं देव्या महावाण्याः सतत्प्राप सुदुर्लभं |
एतन्मे वद तत्त्वेन महायोगीश्वर प्रभो || 3 ||
श्री सनत्कुमार उवाच |
साधु पृष्टं त्वया ब्रह्मन् गुह्याद्गुह्यमनुत्तमं |
मयानुगोपितं यत्नादिदानीं सत्प्रकाश्यते || 4 ||
पुरा पितामहं दृष्ट्वा जगत्स्थावरजंगमं |
निर्विकारं निराभासं स्तंभीभूतमचेतसं || 5 ||
सृष्ट्वा त्रैलोक्यमखिलं वागभावात्तथाविधं |
आधिक्याभावतः स्वस्य परमेष्ठी जगद्गुरुः || 6 ||
दिव्यवर्षायुतं तेन तपो दुष्करमुत्तमं |
ततः कदाचित्संजाता वाणी सर्वार्थशोभिता || 7 ||
अहमस्मि महाविद्या सर्ववाचामधीश्वरी |
मम नाम्नां सहस्रं तु उपदेक्ष्याम्यनुत्तमं || 8 ||
अनेन संस्तुता नित्यं पत्नी तव भवाम्यहं |
त्वया सृष्टं जगत्सर्वं वाणीयुक्तं भविष्यति || 9 ||
इदं रहस्यं परमं मम नामसहस्रकं |
सर्वपापौघशमनं महासारस्वतप्रदं || 10 ||
महाकवित्वदं लोके वागीशत्वप्रदायकं |
त्वं वा परः पुमान्यस्तु स्तवेनाऽनेन तोषयेत् || 11 ||
तस्याहं किंकरी साक्षाद्भविष्यामि न संशयः |
इत्युक्त्वांतर्दधे वाणी तदारभ्य पितामहः || 12 ||
स्तुत्वा स्तोत्रेण दिव्येन तत्पतित्वमवाप्तवान् |
वाणीयुक्तं जगत्सर्वं तदारभ्याभवन्मुने || 13 ||
तत्तेहं संप्रवक्ष्यामि शृणु यत्नेन नारद |
सावधानमना भूत्वा क्षणं शुद्धो मुनीश्वरः || 14 ||
अथ स्तोत्रं |
[** ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा **]
वाग्वाणी वरदा वंद्या वरारोहा वरप्रदा |
वृत्तिर्वागीश्वरी वार्ता वरा वागीशवल्लभा || 1 ||
विश्वेश्वरी विश्ववंद्या विश्वेशप्रियकारिणी |
वाग्वादिनी च वाग्देवी वृद्धिदा वृद्धिकारिणी || 2 ||
वृद्धिर्वृद्धा विषघ्नी च वृष्टिर्वृष्टिप्रदायिनी |
विश्वाराध्या विश्वमाता विश्वधात्री विनायका || 3 ||
विश्वशक्तिर्विश्वसारा विश्वा विश्वविभावरी |
वेदांतवेदिनी वेद्या वित्ता वेदत्रयात्मिका || 4 ||
वेदज्ञा वेदजननी विश्वा विश्वविभावरी |
वरेण्या वाङ्मयी वृद्धा विशिष्टप्रियकारिणी || 5 ||
विश्वतोवदना व्याप्ता व्यापिनी व्यापकात्मिका |
व्यालघ्नी व्यालभूषांगी विरजा वेदनायिका || 6 ||
वेदवेदांतसंवेद्या वेदांतज्ञानरूपिणी |
विभावरी च विक्रांता विश्वामित्रा विधिप्रिया || 7 ||
वरिष्ठा विप्रकृष्टा च विप्रवर्यप्रपूजिता |
वेदरूपा वेदमयी वेदमूर्तिश्च वल्लभा || 8 ||
[** ॐ ह्रीं गुरुरूपे मां गृह्ण ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
गौरी गुणवती गोप्या गंधर्वनगरप्रिया |
गुणमाता गुहांतस्था गुरुरूपा गुरुप्रिया || 9 ||
गिरिविद्या गानतुष्टा गायकप्रियकारिणी |
गायत्री गिरिशाराध्या गीर्गिरीशप्रियंकरी || 10 ||
गिरिज्ञा ज्ञानविद्या च गिरिरूपा गिरीश्वरी |
गीर्माता गणसंस्तुत्या गणनीयगुणान्विता || 11 ||
गूढरूपा गुहा गोप्या गोरूपा गौर्गुणात्मिका |
गुर्वी गुर्वंबिका गुह्या गेयजा ग्रहनाशिनी || 12 ||
गृहिणी गृहदोषघ्नी गवघ्नी गुरुवत्सला |
गृहात्मिका गृहाराध्या गृहबाधाविनाशिनी || 13 ||
गंगा गिरिसुता गम्या गजयाना गुहस्तुता |
गरुडासनसंसेव्या गोमती गुणशालिनी || 14 ||
[** ॐ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
शारदा शाश्वती शैवी शांकरी शंकरात्मिका |
श्रीः शर्वाणी शतघ्नी च शरच्चंद्रनिभानना || 15 ||
शर्मिष्ठा शमनघ्नी च शतसाहस्ररूपिणी |
शिवा शंभुप्रिया श्रद्धा श्रुतिरूपा श्रुतिप्रिया || 16 ||
शुचिष्मती शर्मकरी शुद्धिदा शुद्धिरूपिणी |
शिवा शिवंकरी शुद्धा शिवाराध्या शिवात्मिका || 17 ||
श्रीमती श्रीमयी श्राव्या श्रुतिः श्रवणगोचरा |
शांतिः शांतिकरी शांता शांताचारप्रियंकरी || 18 ||
शीललभ्या शीलवती श्रीमाता शुभकारिणी |
शुभवाणी शुद्धविद्या शुद्धचित्तप्रपूजिता || 19 ||
श्रीकरी श्रुतपापघ्नी शुभाक्षी शुचिवल्लभा |
शिवेतरघ्नी शबरी श्रवणीयगुणान्विता || 20 || [शर्वरी]
शारी शिरीषपुष्पाभा शमनिष्ठा शमात्मिका |
शमान्विता शमाराध्या शितिकंठप्रपूजिता || 21 ||
शुद्धिः शुद्धिकरी श्रेष्ठा श्रुतानंता शुभावहा |
सरस्वती च सर्वज्ञा सर्वसिद्धिप्रदायिनी || 22 ||
[** ॐ ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
सरस्वती च सावित्री संध्या सर्वेप्सितप्रदा |
सर्वार्तिघ्नी सर्वमयी सर्वविद्याप्रदायिनी || 23 ||
सर्वेश्वरी सर्वपुण्या सर्गस्थित्यंतकारिणी |
सर्वाराध्या सर्वमाता सर्वदेवनिषेविता || 24 ||
सर्वैश्वर्यप्रदा सत्या सती सत्वगुणाश्रया |
स्वरक्रमपदाकारा सर्वदोषनिषूदिनी || 25 ||
सहस्राक्षी सहस्रास्या सहस्रपदसंयुता |
सहस्रहस्ता साहस्रगुणालंकृतविग्रहा || 26 ||
सहस्रशीर्षा सद्रूपा स्वधा स्वाहा सुधामयी |
षड्ग्रंथिभेदिनी सेव्या सर्वलोकैकपूजिता || 27 ||
स्तुत्या स्तुतिमयी साध्या सवितृप्रियकारिणी |
संशयच्छेदिनी सांख्यवेद्या संख्या सदीश्वरी || 28 ||
सिद्धिदा सिद्धसंपूज्या सर्वसिद्धिप्रदायिनी |
सर्वज्ञा सर्वशक्तिश्च सर्वसंपत्प्रदायिनी || 29 ||
सर्वाऽशुभघ्नी सुखदा सुखा संवित्स्वरूपिणी |
सर्वसंभीषणी सर्वजगत्सम्मोहिनी तथा || 30 ||
सर्वप्रियंकरी सर्वशुभदा सर्वमंगळा |
सर्वमंत्रमयी सर्वतीर्थपुण्यफलप्रदा || 31 ||
सर्वपुण्यमयी सर्वव्याधिघ्नी सर्वकामदा |
सर्वविघ्नहरी सर्ववंदिता सर्वमंगळा || 32 ||
सर्वमंत्रकरी सर्वलक्ष्मीः सर्वगुणान्विता |
सर्वानंदमयी सर्वज्ञानदा सत्यनायिका || 33 ||
सर्वज्ञानमयी सर्वराज्यदा सर्वमुक्तिदा |
सुप्रभा सर्वदा सर्वा सर्वलोकवशंकरी || 34 ||
सुभगा सुंदरी सिद्धा सिद्धांबा सिद्धमातृका |
सिद्धमाता सिद्धविद्या सिद्धेशी सिद्धरूपिणी || 35 ||
सुरूपिणी सुखमयी सेवकप्रियकारिणी |
स्वामिनी सर्वदा सेव्या स्थूलसूक्ष्मापरांबिका || 36 ||
साररूपा सरोरूपा सत्यभूता समाश्रया |
सिताऽसिता सरोजाक्षी सरोजासनवल्लभा || 37 ||
सरोरुहाभा सर्वांगी सुरेंद्रादिप्रपूजिता |
[** ॐ ह्रीं ऐं महासरस्वति महासारस्वतप्रदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
महादेवी महेशानी महासारस्वतप्रदा || 38 ||
महासरस्वती मुक्ता मुक्तिदा मलनाशिनी |
महेश्वरी महानंदा महामंत्रमयी मही || 39 ||
महालक्ष्मीर्महाविद्या माता मंदरवासिनी |
मंत्रगम्या मंत्रमाता महामंत्रफलप्रदा || 40 ||
महामुक्तिर्महानित्या महासिद्धिप्रदायिनी |
महासिद्धा महामाता महदाकारसंयुता || 41 ||
महा महेश्वरी मूर्तिः मोक्षदा मणिभूषणा |
मेनका मानिनी मान्या मृत्युघ्नी मेरुरूपिणी || 42 ||
मदिराक्षी मदावासा मखरूपा मखेश्वरी |
महामोहा महामाया मातॄणां मूर्ध्निसंस्थिता || 43 ||
महापुण्या मुदावासा महासंपत्प्रदायिनी |
मणिपूरैकनिलया मधुरूपा महोत्कटा || 44 ||
महासूक्ष्मा महाशांता महाशांतिप्रदायिनी |
मुनिस्तुता मोहहंत्री माधवी माधवप्रिया || 45 ||
मा महादेवसंस्तुत्या महिषीगणपूजिता |
मृष्टान्नदा च माहेंद्री महेंद्रपददायिनी || 46 ||
मतिर्मतिप्रदा मेधा मर्त्यलोकनिवासिनी |
मुख्या महानिवासा च महाभाग्यजनाश्रिता || 47 ||
महिळा महिमा मृत्युहारी मेधाप्रदायिनी |
मेध्या महावेगवती महामोक्षफलप्रदा || 48 ||
महाप्रभाभा महती महादेवप्रियंकरी |
महापोषा महर्धिश्च मुक्ताहारविभूषणा || 49 ||
माणिक्यभूषणा मंत्रा मुख्यचंद्रार्धशेखरा |
मनोरूपा मनःशुद्धिः मनःशुद्धिप्रदायिनी || 50 ||
महाकारुण्यसंपूर्णा मनोनमनवंदिता |
महापातकजालघ्नी मुक्तिदा मुक्तभूषणा || 51 ||
मनोन्मनी महास्थूला महाक्रतुफलप्रदा |
महापुण्यफलप्राप्या मायात्रिपुरनाशिनी || 52 ||
महानसा महामेधा महामोदा महेश्वरी |
मालाधरी महोपाया महातीर्थफलप्रदा || 53 ||
महामंगळसंपूर्णा महादारिद्र्यनाशिनी |
महामखा महामेघा महाकाळी महाप्रिया || 54 ||
महाभूषा महादेहा महाराज्ञी मुदालया |
[** ॐ ह्रीं ऐं नमो भगवति ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
भूरिदा भाग्यदा भोग्या भोग्यदा भोगदायिनी || 55 ||
भवानी भूतिदा भूतिः भूमिर्भूमिसुनायिका |
भूतधात्री भयहरी भक्तसारस्वतप्रदा || 56 ||
भुक्तिर्भुक्तिप्रदा भेकी भक्तिर्भक्तिप्रदायिनी |
भक्तसायुज्यदा भक्तस्वर्गदा भक्तराज्यदा || 57 ||
भागीरथी भवाराध्या भाग्यसज्जनपूजिता |
भवस्तुत्या भानुमती भवसागरतारिणी || 58 ||
भूतिर्भूषा च भूतेशी भाललोचनपूजिता |
भूता भव्या भविष्या च भवविद्या भवात्मिका || 59 ||
बाधापहारिणी बंधुरूपा भुवनपूजिता |
भवघ्नी भक्तिलभ्या च भक्तरक्षणतत्परा || 60 ||
भक्तार्तिशमनी भाग्या भोगदानकृतोद्यमा |
भुजंगभूषणा भीमा भीमाक्षी भीमरूपिणी || 61 ||
भाविनी भ्रातृरूपा च भारती भवनायिका |
भाषा भाषावती भीष्मा भैरवी भैरवप्रिया || 62 ||
भूतिर्भासितसर्वांगी भूतिदा भूतिनायिका |
भास्वती भगमाला च भिक्षादानकृतोद्यमा || 63 ||
भिक्षुरूपा भक्तिकरी भक्तलक्ष्मीप्रदायिनी |
भ्रांतिघ्ना भ्रांतिरूपा च भूतिदा भूतिकारिणी || 64 ||
भिक्षणीया भिक्षुमाता भाग्यवद्दृष्टिगोचरा |
भोगवती भोगरूपा भोगमोक्षफलप्रदा || 65 ||
भोगश्रांता भाग्यवती भक्ताघौघविनाशिनी |
[** ॐ ऐं क्लीं सौः बाले ब्राह्मि ब्रह्मपत्नि ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
ब्राह्मी ब्रह्मस्वरूपा च बृहती ब्रह्मवल्लभा || 66 ||
ब्रह्मदा ब्रह्ममाता च ब्रह्माणी ब्रह्मदायिनी |
ब्रह्मेशी ब्रह्मसंस्तुत्या ब्रह्मवेद्या बुधप्रिया || 67 ||
बालेंदुशेखरा बाला बलिपूजाकरप्रिया |
बलदा बिंदुरूपा च बालसूर्यसमप्रभा || 68 ||
ब्रह्मरूपा ब्रह्ममयी ब्रध्नमंडलमध्यगा |
ब्रह्माणी बुद्धिदा बुद्धिर्बुद्धिरूपा बुधेश्वरी || 69 ||
बंधक्षयकरी बाधानाशिनी बंधुरूपिणी |
बिंद्वालया बिंदुभूषा बिंदुनादसमन्विता || 70 ||
बीजरूपा बीजमाता ब्रह्मण्या ब्रह्मकारिणी |
बहुरूपा बलवती ब्रह्मजा ब्रह्मचारिणी || 71 ||
ब्रह्मस्तुत्या ब्रह्मविद्या ब्रह्मांडाधिपवल्लभा |
ब्रह्मेशविष्णुरूपा च ब्रह्मविष्ण्वीशसंस्थिता || 72 ||
बुद्धिरूपा बुधेशानी बंधी बंधविमोचनी |
[** ॐ ह्रीं ऐं अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं लुं* लूं* एं ऐं ॐ औं कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं अक्षमाले अक्षरमालिका समलंकृते वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
अक्षमालाऽक्षराकाराऽक्षराऽक्षरफलप्रदा || 73 ||
अनंताऽऽनंदसुखदाऽनंतचंद्रनिभानना |
अनंतमहिमाऽघोरानंतगंभीरसम्मिता || 74 ||
अदृष्टाऽदृष्टदाऽनंताऽदृष्टभाग्यफलप्रदा |
अरुंधत्यव्ययीनाथाऽनेकसद्गुणसंयुता || 75 ||
अनेकभूषणाऽदृश्याऽनेकलेखनिषेविता |
अनंताऽनंतसुखदाऽघोराऽघोरस्वरूपिणी || 76 ||
अशेषदेवतारूपाऽमृतरूपाऽमृतेश्वरी |
अनवद्याऽनेकहस्ताऽनेकमाणिक्यभूषणा || 77 ||
अनेकविघ्नसंहर्त्री अनेकाभरणान्विता |
अविद्याऽज्ञानसंहर्त्री ह्यविद्याजालनाशिनी || 78 ||
अभिरूपाऽनवद्यांगी ह्यप्रतर्क्यगतिप्रदा |
अकळंकारूपिणी च ह्यनुग्रहपरायणा || 79 ||
अंबरस्थाऽंबरमयाऽंबरमालाऽंबुजेक्षणा |
अंबिकाऽब्जकराऽब्जस्थाऽंशुमत्यऽंशुशतान्विता || 80 ||
अंबुजाऽनवराऽखंडाऽंबुजासनमहाप्रिया |
अजरामरसंसेव्याऽजरसेवितपद्युगा || 81 ||
अतुलार्थप्रदाऽर्थैक्याऽत्युदारा त्वभयान्विता |
अनाथवत्सलाऽनंतप्रियाऽनंतेप्सितप्रदा || 82 ||
अंबुजाक्ष्यंबुरूपाऽंबुजातोद्भवमहाप्रिया |
अखंडा त्वमरस्तुत्याऽमरनायकपूजिता || 83 ||
अजेया त्वजसंकाशाऽज्ञाननाशिन्यभीष्टदा |
अक्ताऽघनेना चाऽस्त्रेशी ह्यलक्ष्मीनाशिनी तथा || 84 ||
अनंतसाराऽनंतश्रीरनंतविधिपूजिता |
अभीष्टामर्त्यसंपूज्या ह्यस्तोदयविवर्जिता || 85 ||
आस्तिकस्वांतनिलयाऽस्त्ररूपाऽस्त्रवती तथा |
अस्खलत्यस्खलद्रूपाऽस्खलद्विद्याप्रदायिनी || 86 ||
अस्खलत्सिद्धिदाऽऽनंदाऽंबुजा चामरनायिका |
अमेयाऽशेषपापघ्न्यक्षयसारस्वतप्रदा || 87 ||
[** ॐ ज्यां ह्रीं जय जय जगन्मातः ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
जया जयंती जयदा जन्मकर्मविवर्जिता |
जगत्प्रिया जगन्माता जगदीश्वरवल्लभा || 88 ||
जातिर्जया जितामित्रा जप्या जपनकारिणी |
जीवनी जीवनिलया जीवाख्या जीवधारिणी || 89 ||
जाह्नवी ज्या जपवती जातिरूपा जयप्रदा |
जनार्दनप्रियकरी जोषणीया जगत्स्थिता || 90 ||
जगज्ज्येष्ठा जगन्माया जीवनत्राणकारिणी |
जीवातुलतिका जीवजन्मी जन्मनिबर्हणी || 91 ||
जाड्यविध्वंसनकरी जगद्योनिर्जयात्मिका |
जगदानंदजननी जंबूश्च जलजेक्षणा || 92 ||
जयंती जंगपूगघ्नी जनितज्ञानविग्रहा |
जटा जटावती जप्या जपकर्तृप्रियंकरी || 93 ||
जपकृत्पापसंहर्त्री जपकृत्फलदायिनी |
जपापुष्पसमप्रख्या जपाकुसुमधारिणी || 94 ||
जननी जन्मरहिता ज्योतिर्वृत्यभिदायिनी |
जटाजूटनचंद्रार्धा जगत्सृष्टिकरी तथा || 95 ||
जगत्त्राणकरी जाड्यध्वंसकर्त्री जयेश्वरी |
जगद्बीजा जयावासा जन्मभूर्जन्मनाशिनी || 96 ||
जन्मांत्यरहिता जैत्री जगद्योनिर्जपात्मिका |
जयलक्षणसंपूर्णा जयदानकृतोद्यमा || 97 ||
जंभारात्यादिसंस्तुत्या जंभारिफलदायिनी |
जगत्त्रयहिता ज्येष्ठा जगत्त्रयवशंकरी || 98 ||
जगत्त्रयांबा जगती ज्वाला ज्वालितलोचना |
ज्वालिनी ज्वलनाभासा ज्वलंती ज्वलनात्मिका || 99 ||
जितारातिसुरस्तुत्या जितक्रोधा जितेंद्रिया |
जरामरणशून्या च जनित्री जन्मनाशिनी || 100 ||
जलजाभा जलमयी जलजासनवल्लभा |
जलजस्था जपाराध्या जनमंगळकारिणी || 101 ||
[** ऐं क्लीं सौः कल्याणि कामधारिणि वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
कामिनी कामरूपा च काम्या कामप्रदायिनी |
कमौळी कामदा कर्त्री क्रतुकर्मफलप्रदा || 102 ||
कृतघ्नघ्नी क्रियारूपा कार्यकारणरूपिणी |
कंजाक्षी करुणारूपा केवलामरसेविता || 103 ||
कल्याणकारिणी कांता कांतिदा कांतिरूपिणी |
कमला कमलावासा कमलोत्पलमालिनी || 104 ||
कुमुद्वती च कल्याणी कांतिः कामेशवल्लभा |
कामेश्वरी कमलिनी कामदा कामबंधिनी || 105 ||
कामधेनुः कांचनाक्षी कांचनाभा कळानिधिः |
क्रिया कीर्तिकरी कीर्तिः क्रतुश्रेष्ठा कृतेश्वरी || 106 ||
क्रतुसर्वक्रियास्तुत्या क्रतुकृत्प्रियकारिणी |
क्लेशनाशकरी कर्त्री कर्मदा कर्मबंधिनी || 107 ||
कर्मबंधहरी कृष्टा क्लमघ्नी कंजलोचना |
कंदर्पजननी कांता करुणा करुणावती || 108 ||
क्लींकारिणी कृपाकारा कृपासिंधुः कृपावती |
करुणार्द्रा कीर्तिकरी कल्मषघ्नी क्रियाकरी || 109 ||
क्रियाशक्तिः कामरूपा कमलोत्पलगंधिनी |
कळा कळावती कूर्मी कूटस्था कंजसंस्थिता || 110 ||
काळिका कल्मषघ्नी च कमनीयजटान्विता |
करपद्मा कराभीष्टप्रदा क्रतुफलप्रदा || 111 ||
कौशिकी कोशदा काव्या कर्त्री कोशेश्वरी कृशा |
कूर्मयाना कल्पलता कालकूटविनाशिनी || 112 ||
कल्पोद्यानवती कल्पवनस्था कल्पकारिणी |
कदंबकुसुमाभासा कदंबकुसुमप्रिया || 113 ||
कदंबोद्यानमध्यस्था कीर्तिदा कीर्तिभूषणा |
कुलमाता कुलावासा कुलाचारप्रियंकरी || 114 ||
कुलनाथा कामकळा कळानाथा कळेश्वरी |
कुंदमंदारपुष्पाभा कपर्दस्थितचंद्रिका || 115 ||
कवित्वदा काव्यमाता कविमाता कळाप्रदा |
[** ॐ सौः क्लीं ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
तरुणी तरुणी ताता ताराधिपसमानना || 116 ||
तृप्तिस्तृप्तिप्रदा तर्क्या तपनी तापिनी तथा |
तर्पणी तीर्थरूपा च त्रिदशा त्रिदशेश्वरी || 117 ||
त्रिदिवेशी त्रिजननी त्रिमाता त्र्यंबकेश्वरी |
त्रिपुरा त्रिपुरेशानी त्र्यंबका त्रिपुरांबिका || 118 ||
त्रिपुरश्रीस्त्रयीरूपा त्रयीवेद्या त्रयीश्वरी |
त्रय्यंतवेदिनी ताम्रा तापत्रितयहारिणी || 119 ||
तमालसदृशी त्राता तरुणादित्यसन्निभा |
त्रैलोक्यव्यापिनी तृप्ता तृप्तिकृत्तत्त्वरूपिणी || 120 ||
तुर्या त्रैलोक्यसंस्तुत्या त्रिगुणा त्रिगुणेश्वरी |
त्रिपुरघ्नी त्रिमाता च त्र्यंबका त्रिगुणान्विता || 121 ||
तृष्णाच्छेदकरी तृप्ता तीक्ष्णा तीक्ष्णस्वरूपिणी |
तुला तुलादिरहिता तत्तद्ब्रह्मस्वरूपिणी || 122 ||
त्राणकर्त्री त्रिपापघ्नी त्रिपदा त्रिदशान्विता |
तथ्या त्रिशक्तिस्त्रिपदा तुर्या त्रैलोक्यसुंदरी || 123 ||
तेजस्करी त्रिमूर्त्याद्या तेजोरूपा त्रिधामता |
त्रिचक्रकर्त्री त्रिभगा तुर्यातीतफलप्रदा || 124 ||
तेजस्विनी तापहरी तापोपप्लवनाशिनी |
तेजोगर्भा तपःसारा त्रिपुरारिप्रियंकरी || 125 ||
तन्वी तापससंतुष्टा तपनांगजभीतिनुत् |
त्रिलोचना त्रिमार्गा च तृतीया त्रिदशस्तुता || 126 ||
त्रिसुंदरी त्रिपथगा तुरीयपददायिनी |
[** ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं नमः शुद्धफलदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
शुभा शुभावती शांता शांतिदा शुभदायिनी || 127 ||
शीतला शूलिनी शीता श्रीमती च शुभान्विता |
[** ॐ ऐं यां यीं यूं यैं यौं यः ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा **]
योगसिद्धिप्रदा योग्या यज्ञेनपरिपूरिता || 128 ||
यज्या यज्ञमयी यक्षी यक्षिणी यक्षिवल्लभा |
यज्ञप्रिया यज्ञपूज्या यज्ञतुष्टा यमस्तुता || 129 ||
यामिनीयप्रभा याम्या यजनीया यशस्करी |
यज्ञकर्त्री यज्ञरूपा यशोदा यज्ञसंस्तुता || 130 ||
यज्ञेशी यज्ञफलदा योगयोनिर्यजुःस्तुता |
यमिसेव्या यमाराध्या यमिपूज्या यमीश्वरी || 131 ||
योगिनी योगरूपा च योगकर्तृप्रियंकरी |
योगयुक्ता योगमयी योगयोगीश्वरांबिका || 132 ||
योगज्ञानमयी योनिर्यमाद्यष्टांगयोगदा |
यंत्रिताघौघसंहारा यमलोकनिवारिणी || 133 ||
यष्टिव्यष्टीशसंस्तुत्या यमाद्यष्टांगयोगयुक् |
योगीश्वरी योगमाता योगसिद्धा च योगदा || 134 ||
योगारूढा योगमयी योगरूपा यवीयसी |
यंत्ररूपा च यंत्रस्था यंत्रपूज्या च यंत्रिता || 135 ||
युगकर्त्री युगमयी युगधर्मविवर्जिता |
यमुना यमिनी याम्या यमुनाजलमध्यगा || 136 ||
यातायातप्रशमनी यातनानां निकृंतनी |
योगावासा योगिवंद्या यत्तच्छब्दस्वरूपिणी || 137 ||
योगक्षेममयी यंत्रा यावदक्षरमातृका |
यावत्पदमयी यावच्छब्दरूपा यथेश्वरी || 138 ||
यत्तदीया यक्षवंद्या यद्विद्या यतिसंस्तुता |
यावद्विद्यामयी यावद्विद्याबृंदसुवंदिता || 139 ||
योगिहृत्पद्मनिलया योगिवर्यप्रियंकरी |
योगिवंद्या योगिमाता योगीशफलदायिनी || 140 ||
यक्षवंद्या यक्षपूज्या यक्षराजसुपूजिता |
यज्ञरूपा यज्ञतुष्टा यायजूकस्वरूपिणी || 141 ||
यंत्राराध्या यंत्रमध्या यंत्रकर्तृप्रियंकरी |
यंत्रारूढा यंत्रपूज्या योगिध्यानपरायणा || 142 ||
यजनीया यमस्तुत्या योगयुक्ता यशस्करी |
योगबद्धा यतिस्तुत्या योगज्ञा योगनायकी || 143 ||
योगिज्ञानप्रदा यक्षी यमबाधाविनाशिनी |
योगिकाम्यप्रदात्री च योगिमोक्षप्रदायिनी || 144 ||
फलश्रुतिः –
इति नाम्नां सरस्वत्याः सहस्रं समुदीरितं |
मंत्रात्मकं महागोप्यं महासारस्वतप्रदं || 1 ||
यः पठेच्छृणुयाद्भक्त्या त्रिकालं साधकः पुमान् |
सर्वविद्यानिधिः साक्षात् स एव भवति ध्रुवं || 2 ||
लभते संपदः सर्वाः पुत्रपौत्रादिसंयुताः |
मूकोऽपि सर्वविद्यासु चतुर्मुख इवापरः || 3 ||
भूत्वा प्राप्नोति सान्निध्यं अंते धातुर्मुनीश्वर |
सर्वमंत्रमयं सर्वविद्यामानफलप्रदं || 4 ||
महाकवित्वदं पुंसां महासिद्धिप्रदायकं |
कस्मैचिन्न प्रदातव्यं प्राणैः कंठगतैरपि || 5 ||
महारहस्यं सततं वाणीनामसहस्रकं |
सुसिद्धमस्मदादीनां स्तोत्रं ते समुदीरितं || 6 ||
इति श्रीस्कांदपुराणांतर्गत सनत्कुमारसंहितायां नारदसनत्कुमारसंवादे श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं ||
अर्थ
श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं वाणी, ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी, माँ सरस्वती को समर्पित एक दिव्य स्तोत्र है जिसमें उनके एक हजार नामों का गुणगान किया गया है। इसका पौराणिक संदर्भ ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के बाद आता है, जब संसार वाणी के अभाव में जड़ और निष्क्रिय था। तब ब्रह्माजी ने दिव्य वर्षों तक तपस्या कर माँ सरस्वती को प्रसन्न किया। नारद मुनि द्वारा सनत्कुमार से इस स्तोत्र के महत्व के बारे में पूछने से इसकी शुरुआत होती है, जो अत्यंत गोपनीय ज्ञान को प्रकट करता है।
यह सहस्रनाम केवल देवी के एक हजार नामों की सूची नहीं है, बल्कि प्रत्येक नाम देवी की एक विशिष्ट शक्ति, गुण या रूप का वर्णन करता है। यह वाणी की शुद्धि, मन की एकाग्रता, रचनात्मकता और आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाने का एक शक्तिशाली साधन है। माँ सरस्वती केवल वीणा और पुस्तक धारण करने वाली देवी नहीं हैं, बल्कि वे समस्त ज्ञान का मूल स्रोत हैं, अज्ञान का नाश करने वाली और मोक्ष की ओर मार्गदर्शन करने वाली हैं। इन नामों का जप करने से आंतरिक शुद्धि और दिव्य चेतना जागृत होती है।
स्तोत्र का ध्यान श्लोक देवी के मनमोहक रूप का वर्णन करता है: चंदन से चर्चित उज्ज्वल शरीर वाली, श्वेत वस्त्र धारण किए हुए, मल्लिका पुष्पों की माला से सुशोभित केशों वाली, मोतियों के हार से चमकती हुई, समस्त ज्ञान का भंडार, पुस्तक और रुद्राक्ष माला धारण किए हुए, तीनों लोकों की माता वाग्देवी हमारे मुख कमल में निवास करें। नारद मुनि जब पूछते हैं कि ब्रह्माजी ने सरस्वती को कैसे प्रसन्न किया, तो सनत्कुमार बताते हैं कि सृष्टि के बाद जब संसार वाणी के अभाव में निष्क्रिय था, तब ब्रह्माजी ने गहन तपस्या करके सरस्वती का आह्वान किया। यह वाणी की शक्ति के महत्व और उसके दिव्य उद्गम को दर्शाता है, जिससे सामान्य व्यक्ति को स्पष्ट वाणी, स्वतंत्र विचार और शैक्षणिक व संगीत अनुसंधान के लिए आशीर्वाद मिलता है।
यह सहस्रनाम छात्रों, शिक्षकों, कवियों, कलाकारों, संगीतकारों, विद्वानों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसका नियमित जप या श्रवण करने से वाणी में स्पष्टता, मन में शांति, सीखने की क्षमता में वृद्धि और रचनात्मक कार्यों में प्रेरणा मिलती है। यह अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करता है। परीक्षाओं से पहले, किसी नए विषय की पढ़ाई शुरू करते समय, या किसी भी रचनात्मक कार्य से पहले इसका पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।
लाभ (Benefits):
- वाणी की शुद्धि और स्पष्टता: नियमित जप से वाणी शुद्ध, स्पष्ट और प्रभावशाली बनती है, जिससे संवाद कौशल में सुधार होता है और व्यक्ति अपने विचारों को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाता है।
- ज्ञान वृद्धि और सीखने की क्षमता: छात्रों को बेहतर स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विषयों को समझने की क्षमता प्राप्त होती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं।
- रचनात्मकता और कलात्मक विकास: कलाकारों, कवियों और संगीतकारों को नई कल्पनाएं, प्रेरणा और कलात्मक कौशल में वृद्धि मिलती है, जिससे उनकी कला में निखार आता है।
- अज्ञान का नाश और आध्यात्मिक प्रगति: मन से अज्ञानता दूर होती है, आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और आंतरिक शांति व आत्म-साक्षात्कार का अनुभव होता है।
- मंत्र सिद्धि और सुरक्षा: मंत्र साधकों को मंत्रों की सिद्धि प्राप्त होती है और देवी की कृपा से सभी बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, जिससे जीवन में शुभता और सफलता आती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
इस सहस्रनाम का कितनी बार जप करना चाहिए?
इस स्तोत्र की उत्पत्ति या स्रोत क्या है?
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