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श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्रं

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स्तोत्र
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श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्रं

सकलमंगळवृद्धिविधायिनि
सकलसद्गुणसंततिदायिनि |
सकलमंजुलसौख्यविकाशिनि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 1 ||

अमरदानवमानवसेविता
जगति जाड्यहरा श्रुतदेवता |
विशदपक्षविहंगविहारिणि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 2 ||

प्रवरपंडितपुरुषपूजिता
प्रवरकांतिविभूषणराजिता |
प्रवरदेहविभाभरमंडिता
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 3 ||

सकलशीतमरीचिसमानना
विहितसेवकबुद्धिविकाशना |
धृतकमंडलुपुस्तकमालिका
हरतु मे दुरितानि सरस्वती || 4 ||

सकलमानससंशयहारिणि
भवभवोर्जितपापनिवारिणि |
सकलसद्गुणसंततिधारिणि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 5 ||

प्रबलवैरिसमूहविमर्दिनि
नृपसभादिषुमानविवर्धिनि |
नतजनोदतसंकटभेदिनि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 6 ||

सकलसद्गुणभूषितविग्रहा
निजतनुद्युतितर्जितविग्रहा |
विशदवस्त्रधराविशदद्युति
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 7 ||

भवदवानलशांतितनूनपा-
-द्धितकरैंकृतिमंत्रकृतकृपा |
भविकचित्तविशुद्धविधायिनि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 8 ||

तनुभृतां जडतामपहृत्य या
विबुधतां ददते मुदिताऽर्चया |
मतिमतां जननीति मताऽत्रसा
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 9 ||

सकलशास्त्रपयोनिधिनौःपरा
विशदकीर्तिधराऽंगितमोहरा |
जिनवराननपद्मनिवासिनि
हरतु मे दुरितानि सरस्वति || 10 ||

इत्थं श्रीश्रुतदेवताभगवती विद्वज्जनानां प्रसूः
सम्यग्ज्ञानवरप्रदा घनतमोनिर्नाशिनी देहिनां |
श्रेयः श्रीवरदायिनी सुविधिना संपूजिता संस्तुता
दुष्कर्माण्यपहृत्य मे विदधतां सम्यक् श्रुतं सर्वदा || 11 ||

इति चिरंतनाचार्य विरचितं श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्रं ||

अर्थ

श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्रं ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित एक अत्यंत मधुर और शक्तिशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र भक्तों के मन को शांति प्रदान करने, ज्ञान को विकसित करने और सभी पापों का नाश करने की क्षमता रखता है। 'सरसशांति सुधारस' शीर्षक ही दर्शाता है कि यह सरस्वती देवी के आशीर्वाद से प्राप्त होने वाली ज्ञानमय शांति और अमृतमय आनंद का वर्णन करता है। यह स्तोत्र प्राचीन आचार्यों द्वारा रचा गया है, जो सरस्वती देवी के विभिन्न गुणों, उनकी महिमा और भक्तों पर उनकी करुणा को अत्यंत सुंदर ढंग से चित्रित करता है।

इस स्तोत्र में, सरस्वती देवी को सभी मंगलकारी वस्तुओं की वृद्धि करने वाली, सद्गुणों को प्रदान करने वाली और आनंद व समृद्धि को विकसित करने वाली के रूप में वर्णित किया गया है। प्रत्येक श्लोक देवी के एक अनूठे गुण को उजागर करता है। उन्हें देवताओं, दानवों और मनुष्यों द्वारा पूजित, अज्ञानता को दूर करने वाली श्रुति देवी के रूप में स्तुति की जाती है। उन्हें एक स्वच्छ हंस पर विचरण करने वाली, विद्वानों द्वारा पूजी जाने वाली, दिव्य कांति से प्रकाशित और अमूल्य आभूषणों से सुशोभित बताया गया है। उनका मुख चंद्रमा के समान शीतल कांति वाला है और वे सेवकों की बुद्धि को प्रसन्न करती हैं। कमंडलु, पुस्तक और जपमाला धारण करने वाली देवी ज्ञान और वैराग्य की प्रतीक हैं।

यह स्तोत्र सरस्वती देवी की मन के संदेहों को दूर करने, पापों को नष्ट करने और सद्गुणों के प्रवाह को बनाए रखने की शक्ति पर प्रकाश डालता है। वे शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली, राजसभाओं में पांडित्य को बढ़ाने वाली और भक्तों के कष्टों को दूर करने वाली हैं। श्वेत वस्त्र धारण किए हुए, अपनी देह की कांति से अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाली उनका रूप मनमोहक है। संसार की अग्नि को शांत करने वाली करुणामयी, मंत्ररूपा और भक्तों के चित्त को शुद्ध करने वाली माता के रूप में उनकी प्रार्थना की जाती है।

सरस्वती देवी जड़ता को दूर कर ज्ञान प्रदान करने वाली, बुद्धिमानों की जननी और आनंदमयी स्वरूपा हैं। समस्त शास्त्रों के सागर स्वरूपा, कीर्तिमयी, मोह का नाश करने वाली और बुद्धिमानों के लिए आश्रयदात्री सरस्वती देवी की इस स्तोत्र के माध्यम से स्तुति की जाती है। इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करने से सद्भावना, श्रेय, वाक् सिद्धि और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, यह भक्तों का दृढ़ विश्वास है। यह केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि देवी की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है।

लाभ (Benefits):

  • ज्ञान और बुद्धि का विकास: इस स्तोत्र के निरंतर पाठ से ज्ञान, ग्रहणशीलता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। यह छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।
  • वाक् सिद्धि और संचार कौशल में सुधार: सरस्वती देवी वाक् की देवी हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ वाणी, संचार कौशल और लेखन क्षमता में सुधार करता है।
  • पाप निवारण और मन की शुद्धि: स्तोत्र में देवी को पापनाशिनी वर्णित किया गया है। इसका पाठ करने से मन के मैल, दुष्कर्म नष्ट होते हैं और आंतरिक शुद्धि प्राप्त होती है।
  • शांति और सुख की प्राप्ति: 'सरसशांति सुधारस' नाम से ही स्पष्ट है कि यह स्तोत्र मन को गहरी शांति और आनंद प्रदान करता है, सांसारिक अशांति को दूर करता है।
  • सद्गुणों की वृद्धि और सकारात्मकता: देवी सद्गुणों की प्रदात्री हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ भक्तों में अच्छे गुणों का विकास करता है और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्रं क्या है?
यह ज्ञान और कला की देवी, माँ सरस्वती की स्तुति में गाया जाने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। इसे मन को शांति, ज्ञान और सद्गुण प्रदान करने के लिए रचा गया है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद, शुद्ध मन से और भक्तिपूर्वक करना चाहिए। सरस्वती पूजा के अवसर पर या विद्यारंभ से पहले इसका पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
इस स्तोत्र के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से ज्ञान, बुद्धि, वाक् सिद्धि, मन की शांति और सद्गुणों में वृद्धि होती है। यह पापों को दूर कर मानसिक शुद्धि प्रदान करता है।
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार, वाणी से संबंधित व्यवसायों में लगे लोग, और ज्ञान तथा मानसिक शांति चाहने वाला कोई भी व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
उत्तम परिणामों के लिए, प्रतिदिन कम से कम 11, 21, या 108 बार पाठ करना उचित है। नियमित रूप से और दृढ़ संकल्प के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है।
श्री सरस्वती सरसशांति सुधारस स्तोत्र का उद्गम क्या है?
यह स्तोत्र प्राचीन आचार्यों द्वारा रचा गया है। इसका सटीक मूल पाठ हिंदू धर्म के विभिन्न स्तोत्र संग्रहों में पाया जाता है।

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