- ॐ सैंहिकेयाय नमः
- ॐ विधुंतुधाय नमः
- ॐ सुरशत्रवे नमः
- ॐ तमसे नमः
- ॐ प्राणिने नमः
- ॐ गार्ग्यायणाय नमः
- ॐ सुरागवे नमः
- ॐ नीलजीमूतसंकाशाय नमः
- ॐ चतुर्भुजाय नमः
- ॐ खड्गखेटकधारिणे नमः
- ॐ वरदाभयहस्तकाय नमः
- ॐ शूलायुधाय नमः
- ॐ मेघवर्णाय नमः
- ॐ कृष्णध्वजपताकवते नमः
- ॐ दक्षिणाशामुखारधाय नमः
- ॐ तीक्ष्ण दंष्ट्राधराय नमः
- ॐ शूर्पाकारासनस्धाय नमः
- ॐ गोमेधाभरण प्रियाय नमः
- ॐ माषप्रियाय नमः
- ॐ काश्यपर्षिनंदनाय नमः
- ॐ उल्कापातजनये नमः
- ॐ शूलिने नमः
- ॐ निधिपाय नमः
- ॐ कृष्णसर्पराजे नमः
- ॐ विषज्वालावृतास्याय नमः
- ॐ अर्धशरीराय नमः
- ॐ जाड्यसंप्रदाय नमः
- ॐ रवींदुभीकराय नमः
- ॐ छायास्वरूपिणे नमः
- ॐ विष्णुचक्रच्छेदिताय नमः
- ॐ कठिनांगकाय नमः
- ॐ द्विषच्चक्रच्छेदकाय नमः
- ॐ कराळास्याय नमः
- ॐ भयंकराय नमः
- ॐ क्रूरकर्मणे नमः
- ॐ तमोरूपाय नमः
- ॐ श्यामात्मने नमः
- ॐ नीललोहिताय नमः
- ॐ किरीटिने नमः
- ॐ नीलवसनाय नमः
- ॐ शनिसामंतावर्त्मगाय नमः
- ॐ चंडालवर्णाय नमः
- ॐ अश्व्यरभवाय नमः
- ॐ मेषभवाय नमः
- ॐ शनिवत्फलदाय नमः
- ॐ शूलाय नमः
- ॐ अपसव्यगतये नमः
- ॐ उपरागकराय नमः
- ॐ सूर्यहिंशुच्छ विहारकाय नमः
- ॐ ग्रहश्रेष्ठाय नमः
- ॐ अष्टम ग्रहाय नमः
- ॐ कबंधमात्रदेहाय नमः
- ॐ यातुधानकुलोद्भवाय नमः
- ॐ गोविंदवरपात्राय नमः
- ॐ देवजातिप्रविष्टकाय नमः
- ॐ क्रूराय नमः
- ॐ घोराय नमः
- ॐ शनिमित्राय नमः
- ॐ शुक्रमित्राय नमः
- ॐ अगोचराय नमः
- ॐ द्यूनेगंगास्नानदात्रे नमः
- ॐ स्वग्रहेप्रबलाढ्यकाय नमः
- ॐ सद्गृहे अन्यस्यबलधृते नमः
- ॐ चतुर्धेमातृनाशाय नमः
- ॐ चंद्रयुक्ते चण्डालजन्म सूचकाय नमः
- ॐ जन्मसिंहेराज्यदात्रे नमः
- ॐ महाकायाय नमः
- ॐ जन्मकर्त्रे नमः
- ॐ विधुरिपवे नमः
- ॐ मत्तकाय नमः
- ॐ जन्मकन्याराज्यदात्रे नमः
- ॐ जन्महानिदाय नमः
- ॐ नवमे पितृनाशाय नमः
- ॐ पंचमेशोकदायकाय नमः
- ॐ द्यूनेकळत्रहंत्रे नमः
- ॐ सप्तमेकलहप्रदाय नमः
- ॐ षष्ठेवित्तदात्रे नमः
- ॐ चतुर्धे वैरदायकाय नमः
- ॐ नवमेपापदात्रे नमः
- ॐ दशमे शोकदायकाय नमः
- ॐ आदौ यशःप्रदात्रे नमः
- ॐ अंतेवैरप्रदायकाय नमः
- ॐ कालात्मने नमः
- ॐ अगोचरचराय नमः
- ॐ धने आस्यककुत्प्र दायकाय नमः
- ॐ पंचमेदृषणा शृंगदाय नमः
- ॐ प्रदायिने नमः
- ॐ स्वर्भानवे नमः
- ॐ बलिने नमः
- ॐ महासौख्यप्रदायिने नमः
- ॐ चंद्रवैरिणे नमः
- ॐ शाश्वताय नमः
- ॐ सूरशत्रवे नमः
- ॐ पापग्रहाय नमः
- ॐ शांभवाय नमः
- ॐ पूजिताय नमः
- ॐ पाठीनपूरणाय नमः
- ॐ पैठीनसकुलोद्भवाय नमः
- ॐ दीर्घाय नमः
- ॐ कृष्णाय नमः
- ॐ अशिरसे नमः
- ॐ विष्णुनेत्रारये नमः
- ॐ देवाय नमः
- ॐ दानवाय नमः
- ॐ भक्तरक्षाय नमः
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः
- ॐ राहुमूर्तये नमः
- ॐ सर्वाभीष्टफलप्रदाय नमः
|| इति श्री राहु अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री राहु अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान राहु के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। ज्योतिष में राहु एक छाया ग्रह है, जो हमारे कर्मों और भाग्य पर गहरा प्रभाव डालता है। यह नामावलि राहु के विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों की स्तुति करती है, जिससे भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलती है। राहु माया, रहस्य, अचानक घटनाओं और गूढ़ विद्याओं के अधिपति हैं, और उनकी पूजा करने से जीवन में संतुलन और स्पष्टता आती है।
राहु अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि राहु की शक्ति से जुड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम है। प्रत्येक नाम राहु के एक अलग आयाम को दर्शाता है, उसके क्रूर और शुभ दोनों रूपों को प्रकट करता है। इन पवित्र नामों का जाप करने से राहु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जाएँ बढ़ती हैं। यह हमारे अज्ञान को दूर कर आध्यात्मिक जागरूकता पैदा करता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
यह नामावलि राहु को सिंहिका के पुत्र ("ओम् सैंहिकेयाय नमः"), चंद्रमा को पीड़ित करने वाले ("ओम् विधुंतुधाय नमः"), अंधकार के रूप ("ओम् तमसे नमः"), चार भुजाओं वाले ("ओम् चतुर्भुजाय नमः"), खड्ग और ढाल धारण करने वाले ("ओम् खड्गखेटकधारिणे नमः"), भगवान विष्णु के चक्र से खंडित हुए ("ओम् विष्णुचक्रच्छेदित्याय नमः") और आधे शरीर वाले ("ओम् अर्धशरीराय नमः") के रूप में वर्णित करती है। गोमेद रत्न के प्रिय राहु को कृष्ण सर्पराज और उड़द दाल के प्रिय के रूप में भी स्तुति की जाती है। ये नाम राहु के भयानक रूप और उनके अद्वितीय गुणों को उजागर करते हैं, भक्तों को उनके स्वरूप को समझने में मदद करते हैं।
यह नामावलि राहु के विभिन्न पहलुओं का परिचय देती है, जिससे उनकी शक्ति और प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। नियमित रूप से इस अष्टोत्तर का पाठ करने से राहु ग्रह से उत्पन्न होने वाले दोष, परेशानियाँ और बाधाएँ दूर होती हैं, ऐसा माना जाता है। यह मन को शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करता है। राहु के आशीर्वाद से, अप्रत्याशित लाभ, राजनीतिक सफलता और ज्ञान में वृद्धि भी संभव हो सकती है।
लाभ (Benefits):
- राहु दोष निवारण: राहु ग्रह के दुष्प्रभाव, ज्योतिषीय दोष और महादशा की समस्याओं से मुक्ति पाने में सहायता करता है।
- बाधाओं का निवारण: जीवन में आने वाली अप्रत्याशित बाधाओं, भ्रम, भ्रांतियों और समस्याओं को दूर कर स्पष्टता लाता है।
- स्वास्थ्य सुधार: राहु संबंधी रोगों (त्वचा रोग, तंत्रिका संबंधी समस्याएँ, मानसिक विकार) से रक्षा कर स्वास्थ्य में सुधार लाता है।
- शत्रु भय निवारण: शत्रुओं के कष्ट, बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा प्रदान कर साहस भरता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: अज्ञान को दूर कर, आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक और गूढ़ शक्तियों के बारे में समझ को बढ़ाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री राहु अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब करना चाहिए?
श्री राहु अष्टोत्तर शतनामावलि पाठ के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का स्रोत क्या है?
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