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श्री मार्तांड स्तोत्रं

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श्री मार्तांड स्तोत्रं

गाढांधकारहरणाय जगद्धिताय
ज्योतिर्मयाय परमेश्वरलोचनाय |
मंदेहदैत्यभुजगर्वविभंजनाय
सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते || 1 ||

छायाप्रियाय मणिकुंडलमंडिताय
सुरोत्तमाय सरसीरुहबांधवाय |
सौवर्णरत्नमकुटाय विकर्तनाय
सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते || 2 ||

संज्ञावधूहृदयपंकजषट्पदाय
गौरीशपंकजभवाच्युतविग्रहाय |
लोकेक्षणाय तपनाय दिवाकराय
सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते || 3 ||

सप्ताश्वबद्धशकटाय ग्रहाधिपाय
रक्तांबराय शरणागतवत्सलाय |
जांबूनदांबुजकराय दिनेश्वराय
सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते || 4 ||

आम्नायभारभरणाय जलप्रदाय
तोयापहाय करुणामृतसागराय |
नारायणाय विविधामरवंदिताय
सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते || 5 ||

इति श्री मार्तांड स्तोत्रं ||

अर्थ

श्री मार्तांड स्तोत्रं भगवान सूर्य के तीव्र किरण स्वरूप और जगत के रक्षक के रूप में उनके परम देवत्व का वर्णन करता है। 'मार्तांड' शब्द सूर्य के प्रखर रूप को दर्शाता है, जो अज्ञान के गहरे अंधकार को दूर कर संसार को प्रकाश प्रदान करते हैं। यह स्तोत्र सूर्यदेव के विभिन्न गुणों, महिमा और लोक कल्याण में उनकी भूमिका का विस्तार से वर्णन करता है। सूर्य केवल भौतिक प्रकाश का स्रोत नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और शक्ति के प्रतीक भी हैं। वे परमेश्वर के दिव्य नेत्र की भाँति संपूर्ण ब्रह्मांड का अवलोकन करते हैं और उसका संतुलन बनाए रखते हैं।

सूर्य में मन्देह नामक अज्ञान और अहंकार के राक्षसों को नष्ट करने की शक्ति है। उनकी तेजस्विता हमारे भीतर के अंधकार को दूर कर सद्भावना और साहस भरती है। वे केवल गर्मी और प्रकाश ही नहीं देते, बल्कि ऋतुओं को नियंत्रित कर, वर्षा और फसल के आधार बनकर समस्त जीवों का पोषण करते हैं। छाया देवी के प्रिय, मणि-कुंडल से सुशोभित तेजस्वी मूर्ति, देवताओं में श्रेष्ठ और कमल के बंधु हैं सूर्य। स्वर्ण रत्नजड़ित मुकुट धारण कर, वे 'विकर्तन' अर्थात अंधकार को दूर करने वाले के रूप में नित्य प्रकाशित होते हैं।

यह स्तोत्र सूर्य को संज्ञा देवी के हृदय कमल में भ्रमर के समान विचरण करने वाला बताता है। वे गौरीश (शिव), पद्मभव (ब्रह्मा) और अच्युत (विष्णु) के प्रतिबिंबित रूप में जगत का दर्शन करते हैं। दिवाकर, लोकपालक और भय निवारक के रूप में सूर्य सभी जीवों को शक्ति प्रदान करते हैं। सात घोड़ों से जुते रथ के स्वामी, ग्रहों के अधिपति, रक्तांबरधारी और शरणागतों के प्रति दयालु हैं। स्वर्ण कमल के समान प्रकाशित हाथों से, दिनेशवर अपनी कृपा बरसाते हैं जिससे सृष्टि सुसंपन्न रूप से चलती है।

सूर्य वेदों के भार को धारण करने वाले, जल प्रदाता और जल का हरण करने वाले (वर्षा चक्र को नियंत्रित करने वाले) हैं। वे करुणा के सागर, नारायण स्वरूप और विभिन्न देवताओं द्वारा वंदित हैं। सूर्य सागर के निर्देशक और सभी लोकों के प्राणदाता हैं। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक "सूर्याय तीव्रकिरणाय नमो नमस्ते" के साथ समाप्त होता है, जो सूर्य के तीव्र तेज को निरंतर नमन करता है और हमारे भीतर सत्त्व भरता है। इस स्तोत्र का जप करने से सूर्य का मार्तांड रूप हमें रक्षा, स्वास्थ्य, दीप्ति, धैर्य और सद्भावना प्रदान करता है।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक और मानसिक अंधकार का निवारण: सूर्य का प्रखर प्रकाश अज्ञान, नकारात्मकता और मानसिक क्लेशों को दूर कर ज्ञान और स्पष्टता लाता है।
  • शारीरिक शक्ति, कांति और दीर्घायु की वृद्धि: सूर्य की उपासना शरीर को शक्ति, तेज और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान कर दीर्घायु का आशीर्वाद देती है।
  • रोग निवारण और स्वास्थ्य सुधार: विशेष रूप से पित्त और रक्त संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है, जिससे शरीर स्वस्थ और निरोगी रहता है।
  • शत्रुओं और दुष्ट शक्तियों से रक्षा: सूर्य की तीव्र किरणें नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं के प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
  • धर्मबल, शुभ उत्साह और सौभाग्य की वृद्धि: इस स्तोत्र का पाठ धार्मिक शक्ति, सकारात्मक मन, उत्साह और समृद्धि को बढ़ाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री मार्तांड स्तोत्रं क्या है?
श्री मार्तांड स्तोत्रं भगवान सूर्य को, विशेष रूप से उनके तीव्र और प्रकाशित 'मार्तांड' रूप को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। यह सूर्य की शक्ति, जगत के पोषण में उनकी भूमिका और अज्ञान को दूर करने की उनकी क्षमता का वर्णन करता है।
श्री मार्तांड स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सूर्योदय के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर, सूर्य की ओर मुख करके या सूर्यदेव के चित्र के सामने भक्तिपूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
श्री मार्तांड स्तोत्र के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से आध्यात्मिक और मानसिक अंधकार दूर होता है, शारीरिक शक्ति, कांति और दीर्घायु प्राप्त होती है। रोग निवारण, शत्रुओं से रक्षा, धर्मबल और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
श्री मार्तांड स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, किसी भी लिंग, आयु या धर्म का हो, इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से वे लोग जो स्वास्थ्य समस्याओं, मानसिक क्लेशों, नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से पीड़ित हैं या सूर्यदेव की कृपा चाहते हैं, इसका पाठ कर सकते हैं।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, एक माला (108 बार) या 3, 5, 11, 21, 51, 108 बार पाठ कर सकते हैं। यदि समय का अभाव हो, तो प्रतिदिन कम से कम एक बार पाठ करना भी लाभकारी होता है। निरंतरता महत्वपूर्ण है।
श्री मार्तांड स्तोत्र का मूल क्या है?
श्री मार्तांड स्तोत्रं हिंदू धर्म की प्राचीन स्तोत्र परंपरा का हिस्सा है। यह वैदिक और पौराणिक ग्रंथों में सूर्यदेव की महिमा का वर्णन करने वाले कई स्तोत्रों में से एक है, जिसे सूर्य भक्तों द्वारा रचा गया है।

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