- ॐ महीसुताय नमः
- ॐ महाभोगाय नमः
- ॐ मंगळाय नमः
- ॐ मंगळप्रदाय नमः
- ॐ महावीराय नमः
- ॐ महाशूराय नमः
- ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
- ॐ महारौद्राय नमः
- ॐ महाभद्राय नमः
- ॐ माननीयाय नमः
- ॐ दयाकराय नमः
- ॐ मानदाय नमः
- ॐ अमर्षणाय नमः
- ॐ क्रूराय नमः
- ॐ तापष्ण विवर्जिताय नमः
- ॐ सुप्रतीपाय नमः
- ॐ सुत्राम्राक्षाय नमः
- ॐ सुब्रह्मण्याय नमः
- ॐ सुखप्रदाय नमः
- ॐ वक्रस्तंभादिगमनाय नमः
- ॐ वरेण्याय नमः
- ॐ वरदाय नमः
- ॐ सुखिने नमः
- ॐ वीरभद्राय नमः
- ॐ विरूपाक्षाय नमः
- ॐ विदूरस्थाय नमः
- ॐ विभावसवे नमः
- ॐ नक्षत्रचक्रसंचारिणे नमः
- ॐ क्षत्रपाय नमः
- ॐ क्षात्रवर्जिताय नमः
- ॐ क्षयवृद्धिविनिर्मुकाय नमः
- ॐ क्षमायुक्ताय नमः
- ॐ विचक्षणाय नमः
- ॐ अक्षीणफलदाय नमः
- ॐ चक्षुरोचराय नमः
- ॐ शुभलक्षणाय नमः
- ॐ वीतरागाय नमः
- ॐ वीतभयाय नमः
- ॐ विज्वराय नमः
- ॐ विश्वकारणाय नमः
- ॐ नक्षत्रराशि संचाराय नमः
- ॐ नानाभयनिकृंतनाय नमः
- ॐ कमनीयाय नमः
- ॐ दयासाराय नमः
- ॐ कनत्कनकभूषणाय नमः
- ॐ भयघ्नाय नमः
- ॐ भव्यफलदाय नमः
- ॐ भक्ताभयवरप्रदाय नमः
- ॐ शत्रुहंत्रे नमः
- ॐ शमोपेताय नमः
- ॐ शरणागतपोषणाय नमः
- ॐ साहसाय नमः
- ॐ सद्गुणाध्यक्षाय नमः
- ॐ साधने नमः
- ॐ समरदुर्जयाय नमः
- ॐ दुष्टरूराय नमः
- ॐ शिष्टपूज्याय नमः
- ॐ सर्वकष्टनिवारकाय नमः
- ॐ दुश्चेष्टवारकाय नमः
- ॐ दुःखभंजनाय नमः
- ॐ दुर्गराय नमः
- ॐ हरये नमः
- ॐ दुस्स्वप्नहंत्रे नमः
- ॐ दुर्गराय नमः
- ॐ दुष्टगर्वविमोचनाय नमः
- ॐ भरद्वाजकुलोद्भूताय नमः
- ॐ भूसुताय नमः
- ॐ भव्यभूताय नमः
- ॐ रक्तांबराय नमः
- ॐ रक्तवपुषे नमः
- ॐ भक्त पालनतत्पराय नमः
- ॐ चतुर्भुजाय नमः
- ॐ गदाधारिणे नमः
- ॐ मेषवाहाय नमः
- ॐ अमिताशनाय नमः
- ॐ शक्ति शूलधराय नमः
- ॐ शक्ताय नमः
- ॐ शस्त्र विद्याविशारदाय नमः
- ॐ तार्किकाय नमः
- ॐ तामसाधाराय नमः
- ॐ तपस्मिने नमः
- ॐ ताम्रलोचनाय नमः
- ॐ तप्तकांचनसंकाशाय नमः
- ॐ रक्तकिंजल्क सन्निभाय नमः
- ॐ गोत्राधिदेवाय नमः
- ॐ गोमध्यचराय नमः
- ॐ गुणविभूषणाय नमः
- ॐ असृजे नमः
- ॐ अंगारकाय नमः
- ॐ अवंतिदेशाधीशाय नमः
- ॐ जनार्दनाय नमः
- ॐ सूर्ययाम्यप्रदेशस्थाय नमः
- ॐ यौवनाय नमः
- ॐ याम्यदिज्मुखाय नमः
- ॐ त्रिकोणमंडलगताय नमः
- ॐ त्रिदशाधिपसन्नुताय नमः
- ॐ शुचये नमः
- ॐ शुचिकराय नमः
- ॐ शूराय नमः
- ॐ शुचिवश्याय नमः
- ॐ शुभावहाय नमः
- ॐ मेषवृश्चिकराशीशाय नमः
- ॐ मेधाविने नमः
- ॐ मितभाषणाय नमः
- ॐ सुखप्रदाय नमः
- ॐ सुरूपाक्षाय नमः
- ॐ सर्वाभीष्टफलप्रदाय नमः
- ॐ श्रीमते अंगारकाय नमः
|| इति श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली मंगल ग्रह (कुज) को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। हिन्दू ज्योतिष में, कुज नवग्रहों में से एक हैं और उन्हें शक्ति, साहस, युद्ध, भूमि और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। यह नामावली कुज ग्रह के विभिन्न गुणों, शक्तियों और दिव्य स्वरूपों का महिमामंडन करती है। 'ओम महीसुताय नमः' (पृथ्वी के पुत्र को नमस्कार) जैसे पहले नाम से ही कुज के उद्गम का स्मरण किया जाता है, जो भूमि और अचल संपत्ति से उनके संबंध को दर्शाता है। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस नामावली का पाठ करने से कुज ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और उनके कारण होने वाले दोषों का निवारण होता है।
कुज अष्टोत्तर शतनामावली का प्रत्येक नाम मंगल ग्रह के अनंत गुणों और शक्तियों को उजागर करता है। 'ओम महाभोगाय नमः' का अर्थ है महान सुख प्रदान करने वाले, और 'ओम मंगलप्रदाय नमः' का अर्थ है शुभता प्रदान करने वाले। ये नाम दर्शाते हैं कि कुज केवल उग्र नहीं हैं, बल्कि भक्तों को सुख, समृद्धि और शुभता प्रदान करने वाले दयालु भी हैं। 'ओम महावीराय नमः', 'ओम महाशूराय नमः', 'ओम महाबलपराक्रमाय नमः' जैसे नाम उनके अद्वितीय शौर्य, बल और पराक्रम को उजागर करते हैं, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस प्रदान करते हैं।
यह नामावली कुज के द्वंद्व स्वरूप का भी वर्णन करती है। उन्हें 'ओम महारौद्राय नमः' (महान रौद्र रूप वाले) कहा गया है, फिर भी उन्हें 'ओम महाभद्राय नमः' (महान शुभता प्रदान करने वाले) और 'ओम दयाकराय नमः' (दयालु) के रूप में भी स्तुति की जाती है। यह इंगित करता है कि उनका उग्र रूप अंततः भक्तों के कल्याण के लिए ही है। 'ओम वक्रस्तंभादिगमनाय नमः' नाम उनकी ज्योतिषीय चाल को दर्शाता है, जो हमें याद दिलाता है कि ग्रहों की गति हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है। 'ओम सुखप्रदाय नमः' और 'ओम सुब्रह्मण्यय नमः' जैसे नाम यह बताते हैं कि कुज को भगवान सुब्रह्मण्य का अंश माना जाता है और वे सुख व शांति प्रदान करने वाले हैं।
'नक्षत्रचक्रसंचारिणे', 'क्षयवृद्धिविनिर्मुक्तय', 'अक्षीणफलदाय' जैसे नाम कुज की सार्वभौमिकता, कालातीत स्वरूप और भक्तों को शाश्वत फल प्रदान करने की क्षमता पर जोर देते हैं। इस नामावली का पाठ केवल ग्रह शांति के लिए ही नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए भी सहायक है। मंगलवार को या जब कुज ग्रह अशुभ स्थिति में हो, इस नामावली का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। कुज के 108 नामों का स्मरण करने से भक्त अपने जीवन में संतुलन, स्थिरता और सफलता प्राप्त करते हैं।
प्रयोजन (Benefits):
- मंगल दोष निवारण: मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति इस नामावली का पाठ करके दोष की गंभीरता को कम कर सकते हैं और वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकते हैं।
- साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि: चूंकि कुज साहस और वीरता के अधिपति हैं, इस नामावली का पाठ व्यक्ति में आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है, जिससे किसी भी चुनौती का सामना करने की शक्ति मिलती है।
- धन और अचल संपत्ति लाभ: कुज भूमि, अचल संपत्ति और भवनों के स्वामी हैं। इस नामावली का पाठ करने से भूमि से संबंधित व्यवसायों में सफलता और धन की वृद्धि होती है।
- शत्रु विजय और बाधा मुक्ति: कुज युद्ध और संघर्ष के देवता हैं। उनके नामों का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, कानूनी विवादों से मुक्ति पाने और जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
- उत्तम स्वास्थ्य और ऊर्जा: कुज रक्त, मांसपेशियों और जीवन शक्ति से संबंधित हैं। इस नामावली का पाठ करने से उत्तम स्वास्थ्य, शारीरिक शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने से क्या लाभ मिलते हैं?
किसे श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करना चाहिए?
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री कुज अष्टोत्तर शतनामावली का उद्गम क्या है?
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