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श्री आंजनेय अष्टोत्तर शतनामावळिः

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  1. ॐ आंजनेयाय नमः 
  2. ॐ महावीराय नमः 
  3. ॐ हनुमते नमः 
  4. ॐ मारुतात्मजाय नमः 
  5. ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः 
  6. ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमः 
  7. ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः 
  8. ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः 
  9. ॐ सर्वबंधविमोक्त्रे नमः 
  10. ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः
  11. ॐ परविद्यापरीहाराय नमः 
  12. ॐ परशौर्यविनाशनाय नमः 
  13. ॐ परमंत्रनिराकर्त्रे नमः 
  14. ॐ परयंत्रप्रभेदकाय नमः 
  15. ॐ सर्वग्रहविनाशिने नमः 
  16. ॐ भीमसेनसहायकृते नमः 
  17. ॐ सर्वदुःखहराय नमः 
  18. ॐ सर्वलोकचारिणे नमः 
  19. ॐ मनोजवाय नमः 
  20. ॐ पारिजातद्रुमूलस्थाय नमः
  21. ॐ सर्वमंत्रस्वरूपिणे नमः 
  22. ॐ सर्वतंत्रस्वरूपिणे नमः 
  23. ॐ सर्वयंत्रात्मकाय नमः 
  24. ॐ कपीश्वराय नमः 
  25. ॐ महाकायाय नमः 
  26. ॐ सर्वरोगहराय नमः 
  27. ॐ प्रभवे नमः 
  28. ॐ बलसिद्धिकराय नमः 
  29. ॐ सर्वविद्यासंपत्प्रदायकाय नमः 
  30. ॐ कपिसेनानायकाय नमः
  31. ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः 
  32. ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः 
  33. ॐ रत्नकुंडलदीप्तिमते नमः 
  34. ॐ संचलद्वालसन्नद्धलंबमानशिखोज्ज्वलाय नमः 
  35. ॐ गंधर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमः 
  36. ॐ महाबलपराक्रमाय नमः 
  37. ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमः 
  38. ॐ शृंखलाबंधमोचकाय नमः 
  39. ॐ सागरोत्तारकाय नमः 
  40. ॐ प्राज्ञाय नमः  
  41. ॐ रामदूताय नमः 
  42. ॐ प्रतापवते नमः 
  43. ॐ वानराय नमः 
  44. ॐ केसरिसुताय नमः 
  45. ॐ सीताशोकनिवारकाय नमः 
  46. ॐ अंजनागर्भसंभूताय नमः 
  47. ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः 
  48. ॐ विभीषणप्रियकराय नमः 
  49. ॐ दशग्रीवकुलांतकाय नमः 
  50. ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः 
  51. ॐ वज्रकायाय नमः 
  52. ॐ महाद्युतये नमः 
  53. ॐ चिरंजीविने नमः 
  54. ॐ रामभक्ताय नमः 
  55. ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः 
  56. ॐ अक्षहंत्रे नमः 
  57. ॐ कांचनाभाय नमः 
  58. ॐ पंचवक्त्राय नमः 
  59. ॐ महातपसे नमः 
  60. ॐ लंकिणीभंजनाय नमः  
  61. ॐ श्रीमते नमः 
  62. ॐ सिंहिकाप्राणभंजनाय नमः 
  63. ॐ गंधमादनशैलस्थाय नमः 
  64. ॐ लंकापुरविदाहकाय नमः 
  65. ॐ सुग्रीवसचिवाय नमः 
  66. ॐ धीराय नमः 
  67. ॐ शूराय नमः 
  68. ॐ दैत्यकुलांतकाय नमः 
  69. ॐ सुरार्चिताय नमः 
  70. ॐ महातेजसे नमः 
  71. ॐ रामचूडामणिप्रदाय नमः 
  72. ॐ कामरूपिणे नमः 
  73. ॐ पिंगळाक्षाय नमः 
  74. ॐ वार्धिमैनाकपूजिताय नमः 
  75. ॐ कबळीकृतमार्तांडमंडलाय नमः 
  76. ॐ विजितेंद्रियाय नमः 
  77. ॐ रामसुग्रीवसंधात्रे नमः 
  78. ॐ महिरावणमर्दनाय नमः 
  79. ॐ स्फटिकाभाय नमः 
  80. ॐ वागधीशाय नमः
  81. ॐ नवव्याकृतिपंडिताय नमः 
  82. ॐ चतुर्बाहवे नमः 
  83. ॐ दीनबंधवे नमः 
  84. ॐ महात्मने नमः 
  85. ॐ भक्तवत्सलाय नमः 
  86. ॐ संजीवननगाहर्त्रे नमः 
  87. ॐ शुचये नमः 
  88. ॐ वाग्मिने नमः 
  89. ॐ दृढव्रताय नमः 
  90. ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः 
  91. ॐ हरिमर्कटमर्कटाय नमः 
  92. ॐ दांताय नमः 
  93. ॐ शांताय नमः 
  94. ॐ प्रसन्नात्मने नमः 
  95. ॐ शतकंठमदापहृते नमः 
  96. ॐ योगिने नमः 
  97. ॐ रामकथालोलाय नमः 
  98. ॐ सीतान्वेषणपंडिताय नमः 
  99. ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः 
  100. ॐ वज्रनखाय नमः  
  101. ॐ रुद्रवीर्यसमुद्भवाय नमः 
  102. ॐ इंद्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः 
  103. ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने नमः 
  104. ॐ शरपंजरभेदकाय नमः 
  105. ॐ दशबाहवे नमः 
  106. ॐ लोकपूज्याय नमः 
  107. ॐ जांबवत्प्रीतिवर्धनाय नमः 
  108. ॐ सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरंधराय नमः  

|| इति श्री आंजनेय स्वामि अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री आंजनेय अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान श्री हनुमान जी के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। हिंदू धर्म में, अष्टोत्तर शतनामावलि किसी भी देवता की पूजा करने, उनके विभिन्न गुणों का स्मरण करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावी तरीका है। इस नामावलि में श्री आंजनेय के शौर्य, भक्ति, ज्ञान, बल और असाधारण गुणों का वर्णन किया गया है। प्रत्येक नाम उनकी दिव्य शक्ति और लोक कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्राप्त करते हैं।

यह नामावलि आंजनेय के दिव्य गुणों को गहराई से उजागर करती है। वे केवल एक शक्तिशाली वानर नहीं हैं, बल्कि 'तत्त्वज्ञानप्रदाय' हैं, जिसका अर्थ है सत्य के ज्ञान को प्रदान करने वाले। वे 'सीतादेवीमुद्राप्रदायक' हैं, जिन्होंने सीता माता की मुद्रिका पहुँचाकर राम-सीता के पुनर्मिलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'अशोकवनिकाच्छेत्त्रे' नाम से वे अशोक वाटिका के विनाशक के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने रावण के अहंकार को तोड़ा। इसके अतिरिक्त, 'सर्वमायाविभंजनाय', 'सर्वबंधविमोक्त्रे', 'रक्षोविध्वंसकारकाय' जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि वे सभी मायाओं का नाश करने वाले, सभी बंधनों से मुक्ति दिलाने वाले और राक्षसों का संहार करने वाले हैं। इन गुणों के कारण भगवान आंजनेय केवल भौतिक शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि अज्ञान और अंधकार को दूर करने वाली आध्यात्मिक शक्ति के भी प्रतीक हैं।

यह स्तोत्र आंजनेय के रक्षात्मक गुणों पर भी प्रकाश डालता है। 'परविद्यापरीहाराय', 'परशौर्यविनाशनाय', 'परमंत्रनिराकर्त्रे', और 'परयंत्रप्रभेदकाय' जैसे नाम यह घोषित करते हैं कि वे शत्रुओं की विद्या, शौर्य, मंत्र और यंत्रों के प्रभाव को नष्ट करने वाले हैं। यह उनकी दुष्ट शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से भक्तों की रक्षा करने की क्षमता को दर्शाता है। 'सर्वग्रहविनाशिन' नाम सभी ग्रह दोषों को दूर करने की शक्ति का प्रतीक है। 'भीमसेनसहायकृते' नाम महाभारत में भीमसेन की सहायता करने की घटना को याद दिलाता है, जो उनके परोपकारी स्वभाव का प्रमाण है।

इसके अलावा, आंजनेय 'सर्वदुःखहराय' हैं, अर्थात सभी दुखों को हरने वाले। वे 'मनोजवाय' हैं, जिसका अर्थ है मन के समान तीव्र गति से चलने वाले। वे 'सर्वमंत्रस्वरूपिणे', 'सर्वतंत्रस्वरूपिणे', 'सर्वयंत्रात्मकाय' हैं, अर्थात सभी मंत्रों, तंत्रों और यंत्रों के मूल स्वरूप हैं। इस नामावलि का पाठ करने से भक्तों को आंजनेय स्वामी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। यह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य, धन और अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रत्येक नाम एक प्रार्थना, एक ध्यान और भगवान के साथ गहरा संबंध स्थापित करने का एक माध्यम है।

लाभ (Benefits):

  • शक्ति और साहस: इस नामावलि का पाठ करने से भक्तों को मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है, साथ ही किसी भी चुनौती का सामना करने का साहस प्राप्त होता है।
  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: आंजनेय स्वामी भक्तों को बुरी शक्तियों, ग्रह दोषों और नकारात्मक प्रभावों से बचाते हैं।
  • रोग निवारण और उत्तम स्वास्थ्य: 'सर्वरोगहराय नमः' नाम से स्पष्ट है कि इस स्तोत्र का पाठ रोगों का नाश कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है।
  • ज्ञान और बुद्धि: 'तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः' नाम यह दर्शाता है कि वे ज्ञान के प्रदाता हैं। इस स्तोत्र के पाठ से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • संकट निवारण: जीवन में आने वाले सभी प्रकार के कष्टों, बाधाओं और दुखों को दूर करने में आंजनेय स्वामी सहायता करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री आंजनेय अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
यह भगवान हनुमान के 108 पवित्र नामों का संग्रह है, जो उनके शौर्य, भक्ति, ज्ञान और अद्भुत गुणों की स्तुति करता है। प्रत्येक नाम उनकी दिव्य शक्ति को दर्शाता है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ मंगलवार, शनिवार या किसी भी शुभ दिन पर स्नान करके शुद्ध मन से करना चाहिए। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर, पूजा के बाद पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री आंजनेय अष्टोत्तर शतनामावलिः के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इसके पाठ से शक्ति, साहस, ज्ञान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। नकारात्मक शक्तियों, ग्रह दोषों और सभी प्रकार के कष्टों से सुरक्षा मिलती है।
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
भगवान की कृपा चाहने वाले, कष्टों से मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाले और हनुमान जी के भक्त कोई भी इस नामावलि का पाठ कर सकते हैं। बच्चे और वयस्क दोनों इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः दिन में एक बार या तीन बार पाठ करना शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधा और भक्ति के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का मूल स्रोत क्या है?
श्री आंजनेय अष्टोत्तर शतनामावलि विभिन्न पुराणों और आगम ग्रंथों से संकलित हनुमान जी के दिव्य नाम हैं। यह सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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